मध्य प्रदेश के एक छोटे से गाँव की किसान बेटी, जिसने डॉक्टर बनने का सपना देखा — पर किस्मत ने रास्ता मोड़ दिया। फिर भी उसने हार नहीं मानी। चार बार गिरी, चार बार उठी और आखिरकार MPPSC में सफलता का परचम लहराया। यह कहानी है भारती ठाकुर की, जो आज छतरपुर जिले के लवकुश नगर में जनपद CEO के पद पर तैनात हैं।
गाँव की मिट्टी से उठा सपना
भारती ठाकुर सागर जिले के केसली तहसील के छोटे से गाँव जनकपुर की रहने वाली हैं। पिता चंद्रभान सिंह एक साधारण किसान हैं और माँ घर सँभालती हैं। प्राइमरी से लेकर 12वीं तक की पढ़ाई गाँव के सरकारी स्कूल में हुई।
11वीं में बायो स्ट्रीम चुनी क्योंकि डॉक्टर बनना था। मेडिकल एंट्रेंस दिया, लेकिन सरकारी MBBS सीट नहीं मिली। BDS मिल रहा था, पर वो उन्हें मंज़ूर नहीं था।
टूटा सपना, नया रास्ता
जब डॉक्टर बनने का सपना टूटा, भारती ने डॉ. हरिसिंह गौर विश्वविद्यालय, सागर से BSc (Chemistry, Botany, Zoology) और फिर 2017 में Botany से MSc पूरी की।
MSc के बाद एक नया सपना जगा — MPPSC State Service Exam देने का। कुछ महीने सोचते-सोचते बीते, फिर तय किया: यही रास्ता है।
चार प्रयास, एक जुनून
2018 — पहला प्रयास
सिर्फ 3 महीने की तैयारी में Prelims क्लियर। इंदौर जाकर कोचिंग ज्वाइन की, लेकिन Mains नहीं निकला। कुछ महीनों में ही कोचिंग छोड़ दी — क्योंकि समझ आ गया कि यह एग्जाम खुद की स्मार्ट स्ट्रेटजी से निकलता है।
2019 — दूसरा प्रयास
Prelims और Mains दोनों पास। Interview तक पहुँचीं, लेकिन Merit list में नाम नहीं आया। निराशा आई, पर खुद को फिर उठाया।
2022 — तीसरा प्रयास
एक बार फिर Interview तक पहुँचीं। फिर वही दर्द — Final selection नहीं हुआ। इस दौरान मन में भारी उथल-पुथल थी। खुद से सवाल किया — “काश MBBS ही कर ली होती।” लेकिन माँ-पापा ने हौसला बनाए रखा।
2023 — चौथा प्रयास, आखिरी जीत
तीसरी बार Interview दिया। Merit list आई। नाम देखा — भारती ठाकुर। 2018 से 2023 तक का सफर, सालों की मेहनत आखिर रंग लाई।
अप्रैल 2026 में मिली पहली पोस्टिंग
अप्रैल 2026 में छतरपुर जिले के लवकुश नगर में जनपद CEO के पद पर पहली पोस्टिंग हुई। उनका लक्ष्य साफ है — ग्रामीण योजनाओं का सही क्रियान्वयन सुनिश्चित करना।
हिंदी मीडियम है ताकत, कमज़ोरी नहीं
भारती ने पूरी Mains परीक्षा हिंदी माध्यम से दी। उनका संदेश है — हिंदी मीडियम के छात्रों को कभी खुद को कमतर नहीं समझना चाहिए।
अभी सफर खत्म नहीं हुआ
27 साल की उम्र में जनपद CEO बन चुकी भारती का अगला सपना है — Deputy Collector बनना। MPPSC एक बार और देंगी, क्योंकि ख्वाहिश अभी बाकी है।
“असफलता अंत नहीं होती, बस एक पड़ाव होती है।” — भारती ठाकुर की कहानी यही सिखाती है।
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