मध्य प्रदेश के एक छोटे से गांव से निकलकर एक लड़की ने वो कर दिखाया, जिसकी कल्पना करना भी मुश्किल है।
घरेलू हिंसा, गरीबी और समाज की बंदिशों के बीच पली-बढ़ी सविता प्रधान ने हार नहीं मानी… और आज वही लड़की IAS अधिकारी बन चुकी हैं।
यह कहानी सिर्फ सफलता नहीं, बल्कि संघर्ष से जीत तक का सफर है।
फोन एडिक्शन, बिना कोचिंग… फिर बनी MPPSC डिप्टी कलेक्टर
गांव की पहली 10वीं पास लड़की
MP के एक आदिवासी परिवार में जन्मी सविता का बचपन बेहद कठिन रहा।
- परिवार मजदूरी कर किसी तरह गुजारा करता था
- गांव में लड़कियों की पढ़ाई को महत्व नहीं दिया जाता था
👉 लेकिन सविता ने इतिहास रचा
वो अपने गांव की पहली लड़की बनीं जिसने 10वीं पास की
2 रुपये बचाने के लिए रोज 7KM पैदल
10वीं के बाद उनका स्कूल घर से 7KM दूर था
- बस का किराया: ₹1 (एक तरफ)
- लेकिन रोज ₹2 देना भी मुश्किल था
👉 इसलिए सविता कई बार 7KM पैदल चलकर स्कूल जाती थीं
16 साल में शादी, सपनों पर लगा ब्रेक
डॉक्टर बनने का सपना देखने वाली सविता की
👉 सिर्फ 16 साल की उम्र में शादी कर दी गई
उन्हें पढ़ाई जारी रखने का वादा किया गया…
लेकिन ससुराल में उन्हें मिला सिर्फ दर्द।
घरेलू हिंसा और अमानवीय व्यवहार
शादी के बाद सविता की जिंदगी बदल गई:
- पति द्वारा मारपीट और अपमान
- खाना तक नहीं दिया जाता था
- मजबूरी में रोटी छुपाकर खानी पड़ती थी
👉 हालात इतने खराब हो गए कि उन्होंने एक बार आत्महत्या करने की कोशिश भी की
लेकिन उसी पल उन्होंने फैसला लिया —
“अब हार नहीं माननी”
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ससुराल छोड़कर शुरू की नई जिंदगी
सविता ने हिम्मत दिखाई और ससुराल छोड़ दिया
- ट्यूशन पढ़ाया
- पार्लर में काम किया
- खुद की पढ़ाई जारी रखी
👉 संघर्ष के बीच भी उन्होंने अपने सपने को जिंदा रखा
पहले MPPSC में सफलता
सविता ने मध्य प्रदेश सिविल सेवा परीक्षा (MPPSC) की तैयारी शुरू की
👉 और पहली बार में ही सफलता हासिल कर ली
- आदिवासी छात्रा के रूप में मिली स्कॉलरशिप
- यही बना उनका confidence boost
UPSC में सफलता, बनी IAS
साल 2017 में उन्होंने UPSC परीक्षा दी
👉 पहली ही कोशिश में:
- Prelims ✔
- Mains ✔
- Interview ✔
👉 और इस तरह सविता प्रधान IAS अधिकारी बन गईं
MPPSC Aspirants के लिए सीख
सविता की कहानी हर MPPSC छात्र के लिए एक संदेश है:
- हालात कैसे भी हों, मेहनत कभी बेकार नहीं जाती
- Failures के बाद भी comeback possible है
- Self-belief सबसे बड़ा हथियार है
यह कहानी बताती है कि Savita Pradhan UPSC success story
👉 “सफलता उन्हीं को मिलती है जो आखिरी तक लड़ते हैं”
MP की इस बेटी ने साबित कर दिया कि
अगर इरादा मजबूत हो, तो कोई भी बाधा बड़ी नहीं होती।