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MPPSC students confidence

MPPSC Students Confidence : इतनी पढ़ाई के बाद भी MPPSC छात्रों को confidence क्यों नहीं आता?

लेखक: Gaurav Gautam
शिक्षा विश्लेषक | MPPSC

शुरुआत: वही हाल जो ज़्यादातर छात्रों का है

कई MPPSC अभ्यर्थी रोज़ घंटों पढ़ाई करते हैं।
सिलेबस भी कवर होता है, नोट्स भी बनते हैं, फिर भी जब खुद से पूछा जाए कि “क्या तैयारी सही चल रही है?” — तो जवाब साफ नहीं होता।
अंदर ही अंदर एक डर बना रहता है कि कहीं मेहनत गलत दिशा में तो नहीं जा रही।

यह समस्या सिर्फ कमजोर छात्रों की नहीं है, बल्कि ज़्यादातर serious aspirants इसी दौर से गुजरते हैं।

यह समस्या अभी क्यों ज़्यादा दिख रही है?

MPPSC जैसी परीक्षाओं में:

  • सिलेबस बड़ा है
  • competition लगातार बढ़ रहा है
  • notification और exam के बीच लंबा gap होता है

इस वजह से छात्र लंबे समय तक पढ़ते रहते हैं, लेकिन उन्हें progress का ठोस संकेत नहीं मिलता।
यहीं से confidence धीरे-धीरे कमजोर होने लगता है।

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विशेषज्ञ नजरिया: confidence क्यों नहीं बन पाता?

पढ़ाई हो रही है, पर माप (measurement) नहीं

ज़्यादातर छात्र यह नहीं जानते कि उनकी तैयारी किस स्तर पर है।
बिना खुद को test किए, सिर्फ पढ़ते रहना confidence नहीं देता।

दूसरों की तैयारी से लगातार तुलना

Telegram groups, toppers की strategies और daily study hours देखकर छात्र यह मान लेते हैं कि वे पीछे हैं, भले ही उनकी तैयारी ठीक चल रही हो।

सिलेबस पूरा करना ही लक्ष्य बन जाना

जब focus सिर्फ “kitna padh liya” पर होता है,
और “kitna samjha” पर नहीं — तो अंदर से भरोसा नहीं बनता।

एक आम मिथक जो confidence तोड़ देता है

मिथक:

“Confidence exam ke paas aate-aate aa hi jata hai।”

हकीकत:
Confidence अचानक नहीं आता।
यह धीरे-धीरे clarity + self-assessment से बनता है।
जो छात्र पूरे साल बिना दिशा के पढ़ते हैं, उनका confidence exam के पास और कमजोर हो जाता है।

MPPSC तैयारी में confidence कैसे develop होता है?

पिछले वर्षों की तैयारी pattern देखने पर एक बात साफ दिखती है:

  • जो छात्र:
    • सीमित source रखते हैं
    • बार-बार वही revise करते हैं
    • अपनी कमजोरियों को पहचानते हैं

उन्हें भले ही सब कुछ न आता हो,
लेकिन उन्हें यह पता होता है कि क्या आता है और क्या नहीं
यही clarity confidence देती है।

deep analysis: confidence असल में है क्या?

Confidence का मतलब यह नहीं कि:

  • सब कुछ याद है
  • या सारे सवाल बन जाते हैं

Confidence का मतलब है:

“मुझे पता है कि exam में मैं क्या handle कर सकता हूँ
और कहाँ मुझे smart decision लेना है।”

जब यह समझ बन जाती है, तो anxiety कम होती है और focus बढ़ता है।

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अब छात्रों को क्या करना चाहिए?

क्या करें

  • रोज़ की पढ़ाई के बाद खुद से 3 सवाल पूछें:
    • आज क्या नया समझा?
    • क्या confuse रहा?
    • कल किसे clear करना है?
  • Limited mock / practice को seriously analyse करें
  • अपने notes बार-बार बदलने से बचें

क्या न करें

  • हर strategy को follow करने की कोशिश
  • daily study hours की तुलना
  • बिना review किए आगे बढ़ते रहना

भरोसे का संकेत

यह विश्लेषण आधिकारिक परीक्षा प्रक्रियाओं, अभ्यर्थियों के अनुभव और पिछले वर्षों की तैयारी प्रवृत्तियों पर आधारित है।

Author Bio

Gaurav Gautam प्रतियोगी परीक्षाओं और शिक्षा से जुड़े विषयों पर
विश्लेषणात्मक लेख लिखते हैं। यह लेख आधिकारिक सूचनाओं और
पिछले परीक्षा रुझानों पर आधारित है।

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