“मेहनत करने वाले छात्र भी क्यों पीछे रह जाते हैं?”
MPPSC Preparation Reality ज़्यादातर छात्र मेहनत की कमी से नहीं,
बल्कि गलत दिशा में मेहनत करने की वजह से असफल होते हैं।
हर साल हज़ारों अभ्यर्थी दिन-रात पढ़ते हैं,
फिर भी चयन कुछ ही लोगों का होता है।
यह लेख उसी कड़वी सच्चाई को सामने रखता है —
जिसे ज़्यादातर कोचिंग और टॉपर्स खुले तौर पर नहीं कहते।
👉 MPPSC topper story जो हर aspirant को पढ़नी चाहिए
MPPSC की तैयारी की सबसे बड़ी गलतफहमी
अधिकांश अभ्यर्थी मानते हैं कि MPPSC Preparation Reality
“ज्यादा पढ़ेंगे = चयन पक्का”
लेकिन MPPSC की वास्तविकता बिल्कुल अलग है।
यह परीक्षा:
- याददाश्त नहीं
- मेहनत की मात्रा नहीं
- बल्कि सही रणनीति + निरंतरता देखती है
1: बिना PYQ समझे तैयारी करना
MPPSC में हर साल topics repeat होते हैं।
फिर भी ज़्यादातर छात्र:
MPPSC Preparation Reality
- पिछले 10 साल के प्रश्न नहीं देखते
- syllabus को line-by-line map नहीं करते
- UPSC की तरह MPPSC पढ़ने लगते हैं
👉 नतीजा:
पढ़ा हुआ बहुत होता है, काम का बहुत कम।
2: Book Hopping Syndrome
एक ही विषय के लिए:
- 3 standard books
- 2 coaching notes
- 10 telegram PDFs
हर महीने source बदलना,
सबसे बड़ा silent killer है।
सच्चाई:
MPPSC में selection
कम sources + ज़्यादा revision से होता है।
👉 Why 90% MPPSC aspirants fail – topper का सच
3: Prelims–Mains का अलग-अलग सोचना
ज़्यादातर छात्र:
- पहले prelims clear करने की सोचते हैं
- mains और answer writing को टालते रहते हैं
लेकिन MPPSC में:
- prelims + mains connected हैं
- mains mindset के बिना prelims भी risky हो जाता है
👉 यही वजह है कि मेहनती छात्र भी cut-off पर अटक जाते हैं।
4: Mock Tests से डरना
बहुत से aspirants:
- mock में कम नंबर देखकर टूट जाते हैं
- test देना ही छोड़ देते हैं
जबकि टॉपर्स मानते हैं:
“Mocks marks के लिए नहीं,
mistakes पहचानने के लिए होते हैं।”
जो अपनी गलतियों को लिखता नहीं,
वही उन्हें दोहराता है।
5 : Consistency नहीं, sirf motivation MPPSC Preparation Reality
Motivation:
- 2–3 दिन रहता है
- फिर गायब हो जाता है
MPPSC selection:
- रोज़ की छोटी जीतों से बनता है
जो छात्र:
- रोज़ 5–6 घंटे लगातार पढ़ता है
- वही 12 घंटे वाले छात्र को पीछे छोड़ देता है
वजह 6: Comparison Trap
Telegram, YouTube, Library — हर जगह:
- “उसका syllabus complete”
- “उसका test score ज़्यादा”
यह तुलना:
- आत्मविश्वास तोड़ती है
- फोकस खत्म करती है
MPPSC दूसरों से तेज़ नहीं,
खुद से बेहतर बनने की परीक्षा है।
वजह 7: Emotional Pressure को ignore करना
परिवार की उम्मीदें,
financial pressure,
बार-बार की असफलता —
इन सबको ignore करने की कोशिश
अंदर ही अंदर aspirant को खोखला कर देती है।
जो छात्र:
- अपने mental health का ध्यान नहीं रखता
- वही बीच रास्ते में preparation छोड़ देता है
फिर चयन किसका होता है?
चयन उनका होता है जो:
✅ limited sources पर भरोसा करता है
✅ PYQ को आधार बनाकर पढ़ता है
✅ mock में fail होकर भी test देता है
✅ comparison छोड़कर consistency पकड़ता है
MPPSC Preparation Reality के लिए ground reality advice
अगर आप मेहनत कर रहे हैं,
फिर भी result नहीं आ रहा —
तो खुद को दोष न दें।
खुद से सिर्फ ये पूछें:
- क्या मैं सही चीज़ पढ़ रहा हूँ?
- क्या मैं बार-बार revise कर रहा हूँ?
- क्या मैं अपनी गलतियाँ लिख रहा हूँ?
यही सवाल
failure और selection के बीच का अंतर बनाते हैं।
अंतिम सच
MPPSC Preparation Reality में:
- ज़्यादा पढ़ने वाले नहीं
- सही पढ़ने वाले जीतते हैं
और यही वजह है कि
इतनी मेहनत के बावजूद
ज़्यादातर MPPSC aspirants fail हो जाते हैं।