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MPPSC Aspirants Fail — क्यों टूट जाते हैं? एक Topper जिसने तैयारी में अपने माता-पिता खो दिए

“चयन सिर्फ पढ़ाई से नहीं, ज़िंदगी से भी होता है”

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हर साल लाखों युवा MPPSC की तैयारी शुरू करते हैं।
मकसद होता है — एक दिन माता-पिता को गर्व महसूस कराना
लेकिन सच्चाई यह है कि 90% से ज़्यादा अभ्यर्थी इस सफर में बीच रास्ते ही टूट जाते हैं।

MPPSC 2023 की टॉपर एकता असवानी (Cooperative Inspector, Rank 9) की कहानी
इस सच्चाई को बेहद गहराई से सामने रखती है।

2019 से शुरू हुई MPPSC की तैयारी

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एकता ने MPPSC की तैयारी 2019 में शुरू की थी।
Prelims निकल जाता था, mains भी देती रहीं —
लेकिन चार बार mains देने के बावजूद इंटरव्यू तक नहीं पहुँच सकीं

“मैं बार-बार mains में फेल हो रही थी,
लेकिन मेरे पापा हमेशा कहते थे — मुझे तुम पर गर्व है।”

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पाँचवाँ प्रयास: जब सब कुछ झोंक देने का एहसास हुआ

2023 में जब एकता ने पाँचवीं बार mains दिया,
तो उन्हें लगा — अब मैंने अपना सब कुछ दे दिया है

घर जाकर उन्होंने पापा को गले लगाया और कहा:

“पापा, इस बार आपकी बेटी इंटरव्यू ज़रूर देगी।”

पापा बहुत खुश थे।
लेकिन सिर्फ एक महीने बाद उनका भी निधन हो गया।

जब तैयारी के साथ ज़िंदगी ने भी इम्तिहान लिया

तैयारी के दौरान एकता ने तीन सबसे बड़े सहारे खो दिए:

  • माँ
  • पिता
  • दादी

माँ का निधन – तैयारी के सिर्फ 6 महीने बाद mppsc 2023 topper

माँ के जाने के बाद पिता जी ने दोनों माता-पिता की भूमिका निभाई
लेकिन इस सदमे ने एकता को मानसिक रूप से तोड़ दिया।

2021–22 के mains इसी दौर में नहीं निकल पाए।

“धरती फट जाए और मैं उसमें समा जाऊँ”

माँ और पिता के निधन के समय एकता लाइब्रेरी में पढ़ाई कर रही थीं

“ऐसा लगता है बस धरती फट जाए और मैं उसके अंदर चली जाऊँ।
वो दर्द मैं किसी को महसूस करते नहीं देखना चाहती।”

सिर्फ 15 दिन बाद, एकता फिर लाइब्रेरी में बैठ गईं।

छोटा भाई: उम्र में छोटा, हिम्मत में सबसे बड़ा

इस पूरे सफर में छोटा भाई एकता की सबसे बड़ी ताकत बना।

“जब हमारे माता-पिता नहीं रहे,
मेरा भाई रोया नहीं।
वो सबको संभाल रहा था,
अपने आँसू छुपा रहा था ताकि उसकी बहन न टूटे।”

एकता कहती हैं —
हर लड़की को भगवान ऐसा भाई दे, जो हमेशा पीछे खड़ा रहे।

दादी: “तुम दुनिया की सबसे बहादुर बेटी हो”

माता-पिता के बाद दादी एकता की सबसे बड़ी ताकत थीं।

“मैं उनसे हमेशा कहती थी —
मुझे आपसे विरासत में हिम्मत मिली है।”

इंटरव्यू से 20 दिन पहले, दादी का भी निधन हो गया।

जिस साड़ी में एकता इंटरव्यू देने गईं,
उसे उन्होंने दादी की फोटो के पास रख दिया।

8 साल की यात्रा: सफलता से ज़्यादा बलिदान

“इन 8 सालों में मैंने बहुत कुछ खोया है।”

लेकिन एकता मानती हैं कि
चयन सिर्फ किताबों से नहीं, इंसानियत से भी होता है।

“It’s good to be good” — टॉपर का जीवन मंत्र

लाइब्रेरी में एकता:

  • नोट्स नहीं छुपाती थीं
  • किताबें शेयर करती थीं
  • जो माँगे, मदद करती थीं

“Goodwill से good luck बनता है।
जो लोग आपकी मदद करते हैं,
वही आपको सफलता की लाइन क्रॉस कराते हैं।”

Silent supporter: हर मजबूत लड़की के पीछे

एकता अपने पार्टनर को अपनी यात्रा का silent supporter मानती हैं।

  • कोचिंग एडमिशन
  • फीस
  • भावनात्मक सहारा

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“वो हमेशा बिना शोर किए मेरे साथ खड़े रहे।”

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Why mppsc aspirants fail

असफलता के मुख्य कारण

  • बार-बार की असफलता से टूट जाना
  • दूसरों से तुलना करना
  • जीवन के झटकों को संभाल न पाना

चयन उन्हीं का होता है जो mppsc preparation journey

  • गिरकर भी उठते हैं
  • दर्द को अनुशासन में बदलते हैं
  • लाइब्रेरी की मेज़ को अपना घर बना लेते हैं

MPPSC अभ्यर्थियों के लिए टॉपर का संदेश

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“अगर आज आपके माता-पिता साथ हैं,
तो उन्हें सबसे बड़ा ट्रिब्यूट यही है
कि आप जीवन में सफल बनें।”

“मैं अपने रिज़ल्ट के दिन
माँ-पापा के चेहरे नहीं देख पाई।
उस पल के लिए पढ़िए।”

अंतिम शब्द mppsc topper story

MPPSC बुद्धिमत्ता की परीक्षा नहीं है
यह हिम्मत, ईमानदारी और इंसानियत की परीक्षा है

और एकता असवानी इस बात का जीवित प्रमाण हैं।

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