MP News: मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग (MPPSC) की परीक्षाओं में उम्र सीमा में छूट की आस लगाए बैठे उम्मीदवारों को हाई कोर्ट से निराशा हाथ लगी है। कोर्ट ने स्पष्ट कर दिया है कि वह भर्ती विज्ञापन की शर्तों और आयु सीमा में हस्तक्षेप नहीं करेगा। जानिए क्या है पूरा मामला और कोर्ट ने अपने फैसले में क्या दलील दी।
क्या था मामला? (The Issue)
सहायक प्राध्यापक (समाजशास्त्र) यानी Assistant Professor भर्ती में एक अभ्यर्थी ने हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी।
- याचिकाकर्ता की मांग: अभ्यर्थी (जो पहले से वन विभाग में शासकीय सेवक है और ST वर्ग से है) ने मांग की थी कि भर्ती प्रक्रिया में देरी होने के कारण उसे आयु सीमा में छूट दी जाए और अधिकतम आयु 50 वर्ष मानी जाए।
- वजह: तर्क दिया गया कि 2022 की भर्ती समय पर पूरी नहीं हुई, जिससे 2024 की भर्ती आते-आते वह 45 वर्ष की अधिकतम आयु सीमा पार कर गया।
हाई कोर्ट का सख्त रुख (High Court’s Verdict)
जबलपुर हाई कोर्ट ने याचिका को सिरे से खारिज कर दिया। कोर्ट ने जो कहा, वह भविष्य की सभी भर्तियों के लिए एक नजीर (Precedent) बन सकता है:
- नियमों में बदलाव नहीं: कोर्ट ने कहा कि भर्ती विज्ञापन की शर्तें सभी के लिए समान हैं। प्रशासनिक देरी (Administrative Delay) चाहे कितनी भी दुर्भाग्यपूर्ण हो, इसके आधार पर कोर्ट भर्ती के नियमों को दोबारा नहीं लिख सकता।
- कट-ऑफ डेट अंतिम: किसी भी उम्मीदवार को तय कट-ऑफ तारीख पर निर्धारित आयु सीमा का पालन करना अनिवार्य है।
- संवैधानिक चुनौती नहीं: चूंकि याचिकाकर्ता ने 45 वर्ष की आयु सीमा की वैधता को चुनौती नहीं दी थी, केवल व्यक्तिगत छूट मांगी थी, इसलिए कोर्ट ने हस्तक्षेप से इनकार कर दिया।
उम्मीदवारों के लिए संकेत
यह फैसला उन सभी अभ्यर्थियों के लिए एक संकेत है जो भर्ती परीक्षाओं में देरी के आधार पर ‘एज रिलैक्सेशन’ (Age Relaxation) की उम्मीद करते हैं। कोर्ट ने साफ कर दिया है कि विज्ञापन में लिखी शर्तें ही अंतिम मान्य होंगी।
महत्वपूर्ण: MPPSC की आगामी परीक्षाओं के लिए अपनी पात्रता (Eligibility) की जांच विज्ञापन की शर्तों के अनुसार ही करें।