मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग (MPPSC) की 26 अप्रैल 2026 को होने वाली प्रारंभिक परीक्षा से पहले एक बड़ा सवाल उम्मीदवारों के बीच चर्चा में है —
क्या MPPSC में प्रतिस्पर्धा कम हो रही है या और ज्यादा गंभीर हो चुकी है?
आंकड़े बताते हैं कि तस्वीर सीधी नहीं है।
ऊपर से देखें तो आवेदन कम हुए हैं।
अंदर से देखें तो प्रतियोगिता और सख्त हुई है।
यह विश्लेषण आधिकारिक नोटिफिकेशन, हालिया भर्ती रुझानों और पिछले वर्षों के पद-संख्या पैटर्न के आधार पर तैयार किया गया है।
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पिछले 8 साल: पदों की संख्या में गिरावट
यदि पिछले कुछ वर्षों का ट्रेंड देखें तो एक स्पष्ट पैटर्न सामने आता है:
- 2019: लगभग 571 पद
- 2020–2021: संख्या में कमी
- 2022: अस्थायी सुधार
- 2024: मात्र 110 पद
- 2025: 158 पद
- 2026: लगभग 155 पद
स्पष्ट है कि 2019 की तुलना में वर्तमान पद संख्या काफी कम है।
हालांकि, आयोग पर पद बढ़ाने को लेकर उम्मीदवारों का दबाव बना रहा है। पूर्व में कई बार नोटिफिकेशन संशोधित कर पदों में वृद्धि की गई है। इसलिए अंतिम संख्या परिणाम से पहले बदल सकती है।
आवेदन संख्या: गिरावट या फिल्टर?
2024 में लगभग 1.83 लाख अभ्यर्थियों ने आवेदन किया था (110 पदों के लिए)।
2025 में पद बढ़े, लेकिन आवेदन संख्या में उल्लेखनीय गिरावट देखी गई।
2026 में लगभग 1.33 लाख आवेदन हुए हैं।
यह 2024 की तुलना में कम है, लेकिन 2025 से अधिक।
इससे एक महत्वपूर्ण संकेत मिलता है:
संख्या कम हुई है, पर गंभीरता बढ़ी है।
प्रति पद 800+ उम्मीदवार: असली प्रतियोगिता यहीं है
यदि 1.33 लाख आवेदन और 155 पद मानें, तो औसतन एक पद पर 800 से अधिक उम्मीदवार दावेदार हैं।
ध्यान देने योग्य बात:
हर साल औसतन 60–65% अभ्यर्थी ही परीक्षा देने पहुंचते हैं।
इस आधार पर अनुमानतः 75,000 से 85,000 के बीच उम्मीदवार वास्तविक रूप से परीक्षा में बैठ सकते हैं।
फिर भी प्रति पद प्रतिस्पर्धा तीव्र बनी रहती है।
इसका मतलब साफ है —
फॉर्म कम हुए हैं, प्रतियोगिता नहीं।
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उम्मीदवारों का रुझान क्यों बदला?
पिछले कुछ वर्षों में MPPSC को प्रशासनिक देरी, परिणामों में विलंब और न्यायालयीन मामलों को लेकर आलोचना का सामना करना पड़ा।
कई परीक्षाओं के परिणाम लंबित रहे।
प्री और मेंस परीक्षाओं का शेड्यूल टकराया।
87:13 आरक्षण अनुपात का मामला अभी भी न्यायिक प्रक्रिया में है।
इन कारणों से कुछ उम्मीदवारों का विश्वास प्रभावित हुआ।
परन्तु 2025 और 2026 में आयोग ने परीक्षा कैलेंडर को अधिक सुव्यवस्थित करने का प्रयास किया है।
यह आंशिक स्थिरता आवेदन संख्या में हल्की वापसी के रूप में दिखाई देती है।
नकारात्मक अंकन (Negative Marking) का प्रभाव
2026 में नकारात्मक अंकन लागू है।
आम तौर पर ऐसी स्थिति में आवेदन घटने की आशंका रहती है।
लेकिन इस बार आवेदन संख्या बढ़ी है।
इसका संकेत है:
जो अभ्यर्थी आवेदन कर रहे हैं, वे गंभीर तैयारी के साथ आ रहे हैं।
अब “ट्रायल फॉर्म” भरने वाले कम हैं।
गंभीर प्रतियोगी अधिक हैं।
क्या प्रतियोगिता वास्तव में कम हुई है?
संख्या घटने से प्रतियोगिता कम नहीं होती।
यदि हल्के उम्मीदवार हट जाते हैं और केवल गंभीर उम्मीदवार बचते हैं, तो प्रतिस्पर्धा और सघन हो जाती है।
पहले 2 लाख आवेदन में से कई आकस्मिक उम्मीदवार होते थे।
अब 1.33 लाख में अधिकतर गंभीर तैयारी वाले शामिल हैं।
इसका अर्थ है:
कट-ऑफ भले संख्या से प्रभावित हो,
गुणवत्ता आधारित प्रतिस्पर्धा बनी रहती है।
अप्रैल 2026 के लिए क्या समझें?
- पद सीमित हैं।
- प्रतियोगिता घनी है।
- गंभीर उम्मीदवारों का अनुपात बढ़ा है।
- नकारात्मक अंकन रणनीति की मांग करेगा।
इस चरण में घबराहट नहीं, रणनीतिक तैयारी महत्वपूर्ण है।
MPPSC 2026 का ट्रेंड एक बात स्पष्ट करता है:
आवेदन कम होना प्रतियोगिता कम होना नहीं है।
यह प्रणाली के परिपक्व होने का संकेत भी हो सकता है, जहाँ केवल गंभीर उम्मीदवार टिके रहते हैं।
यदि आप तैयारी कर रहे हैं, तो आपका मुकाबला अब भी हजारों में है — लेकिन केवल उन्हीं से जो सचमुच चयन चाहते हैं।
प्रतियोगिता जीवित है।
संख्या बदली है।
गंभीरता बढ़ी है।