Written By: Gaurav Gautam
Last Updated: January 10, 2026 | 07:10 PM IST
जब MPPSC 2024 का रिज़ल्ट आया और Divyanshu Shekhare का नाम Rank-1 पर दिखा, तो ये सिर्फ एक चयन नहीं था।
ये उन हजारों aspirants के लिए जवाब था जो सालों से एक ही सवाल पूछ रहे हैं—
“क्या सच में बिना भटके, बिना भीड़ के, MPPSC निकाला जा सकता है?”
गुना में रहकर पढ़ाई करने वाले दिव्यांशु के लिए यह जीत सिर्फ पद की नहीं थी, यह process पर भरोसे की जीत थी।
रिज़ल्ट का वो पल: 10 मिनट तक सिर्फ़ ख़ामोशी और आँसू
दिव्यांशु बताते हैं कि जब पहली बार 2022 में सिलेक्शन हुआ, और फिर 2024 में Rank-1 आया—
दोनों बार reaction एक जैसा था।
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“10–15 मिनट तक कुछ समझ नहीं आता। आप सिर्फ रोते हो।
कोई पास हो या न हो, फर्क नहीं पड़ता। वो moment uncontrollable होता है।”
ये खुशी बाहर से नहीं आती।
ये उन सालों का परिणाम होती है जब कोई आपको देख नहीं रहा होता।
“शहर आ गए हो, लेकिन वापस भी लौटना है” — सबसे कड़वी सच्चाई
इंदौर, भोपाल या दिल्ली…
हर aspirant एक दिन घर छोड़कर शहर आता है।
दिव्यांशु की सबसे गहरी बात यहीं से निकलती है—
“आप किसी भी शहर में आ गए हो, लेकिन आपको वापस लौटना भी है।
आज नहीं तो पाँच साल बाद, लेकिन लौटना है।”
यही वो point है जहाँ 90% aspirants टूटते हैं।
- शहर की चकाचौंध
- दोस्त, कैफ़े, लाइब्रेरी की गपशप
- रिश्ते, distractions
सब कुछ अच्छा लगता है…
पर purpose धुंधला पड़ने लगता है।
Discipline नहीं, Self-Control ने चयन दिलाया
MPPSC Discipline vs Distraction
दिव्यांशु खुद को “असाधारण disciplined” नहीं मानते।
लेकिन उन्होंने long-term distractions को zero किया।
उनका नियम साफ था—
- दोस्ती हो, लेकिन रोज़ की आदत न बने
- मोबाइल हो, लेकिन अलमारी में बंद
- सोशल मीडिया? Exam से पहले पूरी तरह off
“अगर distraction एक दिन का है, कोई बात नहीं।
अगर वो रोज़ का नियम बन गया — तो वही downfall है।”
कोचिंग, टेस्ट सीरीज़ और सबसे बड़ा भ्रम
दिव्यांशु खुलकर कहते हैं— MPPSC Study Plan 2026
- Multiple prelims test series = confusion
- हर coaching का paper अलग direction में
- Aspirant syllabus से ज़्यादा test के पीछे भागता है
“Question उठा के देख लो।
Test series और actual paper में जमीन-आसमान का फर्क है।”
उनका भरोसा रहा—
- PYQ
- Limited sources
- Repeated revision
“अगर चीज़ आपके हाथ में नहीं है, तो दिमाग में भी नहीं होनी चाहिए”
Exam delay, notification, vacancy —
इन सब पर aspirants दिन-रात सोचते हैं।
दिव्यांशु ने साफ कहा—
“Exam कब होगा, आयोग को पता है।
मेरे हाथ में क्या है? सिर्फ़ मेरी तैयारी।”
यही सोच उन्हें panic से बचाती रही।
तीन तरह के Aspirants — और एक ही सही रास्ता
दिव्यांशु aspirants को तीन वर्गों में बाँटते हैं:
- शिकायत करने वाले
– कोचिंग खराब थी
– सिस्टम गलत है - Just happy type
– Flow में जीते हैं
– कोई urgency नहीं - Motivated & Aware
– Present से संतुष्ट
– Future बेहतर बनाने पर focused
Rank-1 तीसरे वर्ग से आता है।
Preparation को “Life-Struggle” मत बनाओ
एक बहुत important बात जो transcript में बार-बार आती है—
“Personal problems को unnecessarily बड़ा मत बनाओ।
Family problem अलग चीज़ है, बाकी ज़्यादातर imagination है।”
हर aspirant को लगता है —
“मेरी life सबसे ज़्यादा difficult है।”
लेकिन यही सोच धीरे-धीरे ego और frustration बन जाती है।
सबसे बड़ा lesson: Process को Enjoy नहीं, Respect करो
Divyanshu कहते हैं—
Process enjoy करना मतलब मौज-मस्ती नहीं।
मतलब ये समझना कि—
- आज का काम आज
- distraction को पहचानना
- purpose याद रखना
“पढ़ाई और enjoyment exclusive नहीं हैं,
लेकिन priority हमेशा clear होनी चाहिए।”
अंतिम बात: बड़ी तस्वीर देखो
शहर में एक दिन की खुशी—
- मूवी
- दोस्त
- घूमना
और selection के बाद की खुशी—
- माता-पिता की आँखें
- गाँव/इलाके का गर्व
- खुद का आत्मविश्वास
“छोटी खुशी क्षणिक है,
selection वाली खुशी तारीख बन जाती है।”
अगर आप MPPSC की तैयारी कर रहे हैं…
तो दिव्यांशु शेखरे की कहानी आपको ये याद दिलाती है:
- Rank strategy से नहीं, mindset से आता है
- Selection motivation से नहीं, control से होता है
- और सबसे ज़रूरी —
आप जहाँ भी हो, लौटकर जवाब देना है