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MPPSC success story: 2 बार प्री रुका फिर DSP बनी

MPPSC में प्री बार-बार क्यों रुकता है? DSP Sneha Bable Success Story ने खुद बताई सबसे बड़ी गलती

DSP Sneha Bable Success Story – MPPSC की तैयारी कर रहे हजारों अभ्यर्थियों के मन में एक डर हमेशा रहता है—
“क्या जो सेलेक्ट होते हैं, वो हमसे अलग होते हैं?”
“क्या हम जैसे सामान्य छात्र कभी अफसर बन सकते हैं?”

MPPSC 2022 में DSP पद पर 7वीं रैंक हासिल करने वाली स्नेहा बबले की कहानी इन सभी सवालों का जवाब है।

5 बार प्री भी नहीं निकला, फिर 6वीं कोशिश में सीधे अफसर बने, डिप्टी कलेक्टर का पद छोड़ चुनी वर्दी – MPPSC की यह कहानी जरूर पढ़ें

2020 में इंदौर आईं, लेकिन शुरुआती 2 प्री में मिली असफलता

ग्वालियर से ताल्लुक रखने वाली स्नेहा बबले ने अपनी पढ़ाई वहीं से पूरी की। MPPSC की तैयारी के लिए वे 2020 में इंदौर आईं।
लेकिन शुरुआत आसान नहीं थी।

  • 2020 का प्रीलिम्स – नहीं निकला
  • 2021 का प्रीलिम्स – फिर रुक गया

यहीं से वो दौर शुरू हुआ, जहाँ ज्यादातर एस्पिरेंट हार मान लेते हैं।

प्री क्यों नहीं निकल रहा था? खुद बताई सबसे बड़ी गलती

स्नेहा बबले ने खुलकर माना कि उनकी सबसे बड़ी गलती थी:

“मैंने प्रीलिम्स में पर्याप्त MCQ practice नहीं की”

उनका कहना है कि:

  • बिना ऑब्जेक्टिव प्रैक्टिस के
  • सही आते सवाल भी doubt में गलत हो जाते हैं

यही कारण था कि पहले दो प्रयासों में प्री नहीं निकल पाया।

जहाँ ज़्यादातर बच्चे फिर प्री पढ़ते हैं, उन्होंने मेंस चुना

2020 और 2021 में प्रीलिम्स रुकने के बाद भी स्नेहा ने एक बड़ा फैसला लिया।
उन्होंने फिर से सिर्फ प्रीलिम्स पर नहीं, बल्कि मेंस की तैयारी जारी रखी

यही फैसला आगे चलकर उनके चयन की सबसे बड़ी वजह बना।

2022 में बदली कहानी – प्री, मेंस और चयन

2022 का प्रयास उनका तीसरा अटेम्प्ट था।

इस बार:

  • प्रीलिम्स क्लियर
  • मेंस क्लियर
  • और इंटरव्यू के बाद DSP पद पर 7वीं रैंक

खास बात यह रही कि:

  • इंटरव्यू में उन्हें सिर्फ 100 अंक मिले
  • लेकिन मेंस में 760+ अंक ने उन्हें DSP बना दिया

यानी उनका चयन पूरी तरह मेंस की ताकत पर हुआ।

मेंस में क्या किया अलग? (Topper-level clarity)

स्नेहा बबले बताती हैं कि:

  • उन्होंने घंटों नहीं, effectively 7–8 घंटे पढ़ाई की
  • Answer writing में:
    • साफ कॉपी
    • flow chart
    • diagrams
    • और boxed facts का इस्तेमाल किया

उनका साफ संदेश है:

“कॉपी ऐसी बनाओ कि examiner को पढ़ने में अच्छा लगे”

हिंदी और निबंध: इंग्लिश मीडियम होकर भी नहीं डरीं

इंग्लिश मीडियम background होने के बावजूद:

  • उन्होंने हिंदी पहले से basic level तक तैयार कर रखी थी
  • निबंध का पहला practice उन्होंने सीधे परीक्षा में किया

उनका मानना है कि:

  • फॉर्मेट समझो
  • डर मत पालो
  • जो आता है, साफ लिखो

परिवार का साथ मिला, लेकिन समाज ने सवाल भी उठाए

स्नेहा बबले ने यह भी स्वीकार किया कि:

  • माता-पिता का पूरा सपोर्ट मिला
  • लेकिन रिश्तेदारों और समाज से ताने भी सुनने पड़े

“इंदौर क्यों भेज रहे हो?”
“लड़कियां बाहर जाकर क्या करती हैं?”

लेकिन उन्होंने इन बातों को अपनी कमजोरी नहीं बनने दिया।

MPPSC एस्पिरेंट्स के लिए उनका सीधा संदेश

स्नेहा बबले कहती हैं:

  • प्रीलिम्स के लिए MCQ practice जरूरी है
  • प्रीलिम्स रुक जाए, तब भी मेंस मत छोड़ो
  • सोशल मीडिया से दूर नहीं, लेकिन limit में रहो
  • selection एक दिन में नहीं, सालों की consistency से आता है

असफलता अंत नहीं, प्रक्रिया का हिस्सा है

2 बार प्रीलिम्स रुकने के बाद भी DSP बनना यह साबित करता है कि:

  • MPPSC में समय लगता है
  • लेकिन सही दिशा में मेहनत कभी बेकार नहीं जाती

यह कहानी हर उस अभ्यर्थी के लिए है,
जो आज भी सोच रहा है—
“मुझसे होगा या नहीं?”

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📌 नोट

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